मंत्र Mantra
अर्थ Meaning
प्रथम शैलपुत्री मंत्र :
वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् ।
वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥
द्वितीय ब्रह्मचारिणी:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
तृतीय चंद्रघंटा :
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
चतुर्थ कुष्मांडा :
सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥
पंचम स्कन्दमाता :
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
षष्ट्म कात्यायनी :
चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
सप्तम कालरात्रि :
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
अष्ट्म महागौरी :
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेतांबर धरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
नवम सिद्धिदात्री :
सिद्ध गंधर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदाहिनी॥
